संस्कृत के विख्यात विद्वान प्रोफेसर पाॅल डायसन के निमंत्रण पर विवेकानन्द स्विटज़रलैंड से जर्मनी गए। बड़े-बड़े शहरों तथा राजधानियों को देखते हुए वे कील पहुंचे। प्रो. पाॅल डायसन कील विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्राध्यापक थे। उनके साथ उपनिषद् वेदान्त-दर्शन और शांकर-भाष्य पर विचार-विनिमय हुआ।
ज्ञान-चर्चा के दौरान प्रोफेसर महोदय किसी काम से उठकर चले गए। थोड़ी देर बाद वे लौटे तो देखा कि स्वामी जी कविता की एक पुस्तक के पन्ने
संस्कृत के विख्यात विद्वान प्रोफेसर पाॅल डायसन के निमंत्रण पर विवेकानन्द स्विटज़रलैंड से जर्मनी गए। बड़े-बड़े शहरों तथा राजधानियों को देखते हुए वे कील पहुंचे। प्रो. पाॅल डायसन कील विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्राध्यापक थे। उनके साथ उपनिषद् वेदान्त-दर्शन और शांकर-भाष्य पर विचार-विनिमय हुआ।
ज्ञान-चर्चा के दौरान प्रोफेसर महोदय किसी काम से उठकर चले गए। थोड़ी देर बाद वे लौटे तो देखा कि स्वामी जी कविता की एक पुस्तक के पन्ने