उलट रहे हैं। इस काम में वे इतने मग्न थे कि उन्हें प्रोफेसर की आहट भी सुनाई नहीं पड़ी। पुस्तक समाप्त हो गई, स्वामी जी ने तब उन्हें अपने पास बैठे देखा। बोले, ‘‘पुस्तक पढ़ रहा था सम्भव है कि आप बहुत देर से आए हों। क्षमा कीजिएगा।’’ चेहरा देखकर स्वामी जी ने यह भी भांप लिया कि पाॅल डायसन को उनकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। स्वामी जी ने उनका संदेह मिटाने के लिए पुस्तक में पढ़ी हुई कविताएं सुनाना शुरू कीं। प्रोफेसर महोदय विस्मय मंे भरकर बोले, ‘‘आपने यह पुस्तक अवश्य
उलट रहे हैं। इस काम में वे इतने मग्न थे कि उन्हें प्रोफेसर की आहट भी सुनाई नहीं पड़ी। पुस्तक समाप्त हो गई, स्वामी जी ने तब उन्हें अपने पास बैठे देखा। बोले, ‘‘पुस्तक पढ़ रहा था सम्भव है कि आप बहुत देर से आए हों। क्षमा कीजिएगा।’’ चेहरा देखकर स्वामी जी ने यह भी भांप लिया कि पाॅल डायसन को उनकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। स्वामी जी ने उनका संदेह मिटाने के लिए पुस्तक में पढ़ी हुई कविताएं सुनाना शुरू कीं। प्रोफेसर महोदय विस्मय मंे भरकर बोले, ‘‘आपने यह पुस्तक अवश्य