उतनी ही दूरदर्शी भी थी। अगस्त, 1893 में वे न्यू इंग्लैंड के एनिसक्वास गांव में प्रोफेसर जे. एच. राइट के मान पर ठहरे हुए थे। वहां चुने हुए बुद्विजीवियों से विवेकानन्द की जो वार्ता हुई उसे श्रीमती राइट ने ‘इतिहास का प्रतिशोध’ शीर्षक से लिपिबद्व किया है। उसका कुछ अंश हम यहां उद्वत करते हैं, जिससे स्वामी जी की दूरदर्शिता तथा मानव प्रेम और साम्राज्यवाद के प्रति तीव्र घृणा का पता चलेगा। लिखा है, ‘अभी कल की बात है, उन्होंने अपनी संगीतमय ध्वनि में कहा,
उतनी ही दूरदर्शी भी थी। अगस्त, 1893 में वे न्यू इंग्लैंड के एनिसक्वास गांव में प्रोफेसर जे. एच. राइट के मान पर ठहरे हुए थे। वहां चुने हुए बुद्विजीवियों से विवेकानन्द की जो वार्ता हुई उसे श्रीमती राइट ने ‘इतिहास का प्रतिशोध’ शीर्षक से लिपिबद्व किया है। उसका कुछ अंश हम यहां उद्वत करते हैं, जिससे स्वामी जी की दूरदर्शिता तथा मानव प्रेम और साम्राज्यवाद के प्रति तीव्र घृणा का पता चलेगा। लिखा है, ‘अभी कल की बात है, उन्होंने अपनी संगीतमय ध्वनि में कहा,