योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

ठीक, सिर्फ कल की-चार सौ वर्ष से अधिक पूर्व नहीं।’’ फिर उन्होंने एक धीर जाति और उत्पीड़ित राष्ट्र के ऊपर की गई निर्दयता और दमन की कहानियां सुनाई और भविष्य में आने वाले निर्णय की!

‘‘ओह, अंग्रेज़!’’ उन्होंने कहा, ‘‘केवल कुछ समय पहले वे बर्बर थे...स्त्रियों के शरीर पर कीड़ें रेंगते थे...और अपने शरीर की घिनौनी दुर्गन्ध छिपाने के लिए वे सुगंध लगाती थी....और अपने शरीर की घिनौनी दुर्गन्ध छिपाने के लिए वे सुगंध लगाती थी...अत्यंत


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ठीक, सिर्फ कल की-चार सौ वर्ष से अधिक पूर्व नहीं।’’ फिर उन्होंने एक धीर जाति और उत्पीड़ित राष्ट्र के ऊपर की गई निर्दयता और दमन की कहानियां सुनाई और भविष्य में आने वाले निर्णय की!

‘‘ओह, अंग्रेज़!’’ उन्होंने कहा, ‘‘केवल कुछ समय पहले वे बर्बर थे...स्त्रियों के शरीर पर कीड़ें रेंगते थे...और अपने शरीर की घिनौनी दुर्गन्ध छिपाने के लिए वे सुगंध लगाती थी....और अपने शरीर की घिनौनी दुर्गन्ध छिपाने के लिए वे सुगंध लगाती थी...अत्यंत


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