योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

बीभत्स! तब भी वे केवल उस बर्बरता में से एक ने कहा, ‘‘यह तो कम-से-कम पांच सौ वर्ष पहले की बात है।’

‘‘और क्या मैंने नहीं कहा ज़रा देर पहले? मनुष्य की आत्मा की प्राचीनता को दृष्टि में रखने पर इन कुछ सौ वर्षों की क्या गिनती है? तब स्वर में एक विनम्र और औचित्यपूर्ण परिवर्तन करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वे नितान्त बर्बर हैं। भयानक शीत और उनके उत्तरी जलवायू जन्य अभावों और कष्टों ने उन्हें जंगली बना डाला है।’ उन्होंने कुछ अधिक भावना के साथ तेज़ी से कहा,


422 of 1197

बीभत्स! तब भी वे केवल उस बर्बरता में से एक ने कहा, ‘‘यह तो कम-से-कम पांच सौ वर्ष पहले की बात है।’

‘‘और क्या मैंने नहीं कहा ज़रा देर पहले? मनुष्य की आत्मा की प्राचीनता को दृष्टि में रखने पर इन कुछ सौ वर्षों की क्या गिनती है? तब स्वर में एक विनम्र और औचित्यपूर्ण परिवर्तन करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वे नितान्त बर्बर हैं। भयानक शीत और उनके उत्तरी जलवायू जन्य अभावों और कष्टों ने उन्हें जंगली बना डाला है।’ उन्होंने कुछ अधिक भावना के साथ तेज़ी से कहा,


422 of 1197