योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘वे केवल मार डालने की बात सोचते हैं-उनका धर्म कहां है? वे उस पवित्र पुरूष का नाम लेते हैं, वे अपने मनुष्य भाइयों से प्रेम करने का दावा करते हैं, वे सभ्य बनते हैं-ईसाई धर्म के द्वारा-नहीं, यह तो उनकी भूख है, जिसने उन्हें सभ्य बनाया है। उनके ईश्वर ने नहीं। मानव-प्रेम तो केवल उनकी जिह्म पर है, उनके हृदय में और कुछ नहीं, केवल बुराई और हर प्रकार की हिंसा ही हिंसा है। मेरे भाई, मैं तुमको प्यार करता हूं। मैं तुम्हें प्यार करता


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‘वे केवल मार डालने की बात सोचते हैं-उनका धर्म कहां है? वे उस पवित्र पुरूष का नाम लेते हैं, वे अपने मनुष्य भाइयों से प्रेम करने का दावा करते हैं, वे सभ्य बनते हैं-ईसाई धर्म के द्वारा-नहीं, यह तो उनकी भूख है, जिसने उन्हें सभ्य बनाया है। उनके ईश्वर ने नहीं। मानव-प्रेम तो केवल उनकी जिह्म पर है, उनके हृदय में और कुछ नहीं, केवल बुराई और हर प्रकार की हिंसा ही हिंसा है। मेरे भाई, मैं तुमको प्यार करता हूं। मैं तुम्हें प्यार करता


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