योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

हूं।’...तब कुछ और धीरे बोलते हुए उनका मधुर कंठ गम्भीर होता गया, और अन्त में घंटा निनाद के सदृश ध्वनित हो उठा, ‘किन्तु उन्हें ईश्वर के दंड का भागी बनना पडे़गा। प्रभु कहते हैं कि प्रतिशोध मेरा है, मैं उसे चुकाऊंगा और विनाश आ रहा है। तुम्हारे ईसाई कितने हैं? दुनिया के एक तिहाई भी नहीं। उन कोटि-कोटि चीनियों को देखो। वे ईश्वर का प्रतिशोध हैं जो तुम्हारे ऊपर उद्दीप्त हो उठेगा। हूणों का एक और आक्रमण होगा। ‘कुछ बुदबुदाते हुए उन्होंने कहा,


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हूं।’...तब कुछ और धीरे बोलते हुए उनका मधुर कंठ गम्भीर होता गया, और अन्त में घंटा निनाद के सदृश ध्वनित हो उठा, ‘किन्तु उन्हें ईश्वर के दंड का भागी बनना पडे़गा। प्रभु कहते हैं कि प्रतिशोध मेरा है, मैं उसे चुकाऊंगा और विनाश आ रहा है। तुम्हारे ईसाई कितने हैं? दुनिया के एक तिहाई भी नहीं। उन कोटि-कोटि चीनियों को देखो। वे ईश्वर का प्रतिशोध हैं जो तुम्हारे ऊपर उद्दीप्त हो उठेगा। हूणों का एक और आक्रमण होगा। ‘कुछ बुदबुदाते हुए उन्होंने कहा,


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