‘वे समस्त यूरोप को पदाक्रान्त कर देंगे, वे एक भी ईंट साबित नहीं छोड़ेगे। पुरूष, स्त्रियां और बच्चे सभी चल बसेंगे और अंध युग फिर आएगा।’ उनके स्वर में वर्णनातीत वेदना और करूणा थी। तत्पश्चात् अचानक उदासीनतापूर्वक अपने
90 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
युगद्रष्टा को अलग करते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे कोई चिन्ता नहीं है! दुनिया इससे और अच्छी होकर निकलेगी, किन्तु यह सब आ रहा है। ईश्वर का प्रतिशोध, यह शीघ्र आ रहा है।’’
उनकी वार्ता में तनिक भावुकता है,
‘वे समस्त यूरोप को पदाक्रान्त कर देंगे, वे एक भी ईंट साबित नहीं छोड़ेगे। पुरूष, स्त्रियां और बच्चे सभी चल बसेंगे और अंध युग फिर आएगा।’ उनके स्वर में वर्णनातीत वेदना और करूणा थी। तत्पश्चात् अचानक उदासीनतापूर्वक अपने
90 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
युगद्रष्टा को अलग करते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे कोई चिन्ता नहीं है! दुनिया इससे और अच्छी होकर निकलेगी, किन्तु यह सब आ रहा है। ईश्वर का प्रतिशोध, यह शीघ्र आ रहा है।’’
उनकी वार्ता में तनिक भावुकता है,