तब वहां भारत की विचारधारा प्रवाहित हुई थी, और ईसाई धर्मावलम्बी जिस सभ्यता की डींग हांक रहे हैं, वह भी भारतीय विचारों के छोटे-छोट कणों के संग्रह के सिवा और कुछ नहीं। बौद्व धर्म, अपनी समस्त महानता के साथ जिसकी विद्रोही संतान है और ईसाई धर्म जिसकी नगण्य नकल मात्र है, वहीं हमारा धर्म है। युगचक्र फिर घूमा है, वैसा ही समय फिर आया है, इंग्लैंड की प्रबल शक्ति ने भूमंडल के भिन्न-भिन्न भागों को फिर एक दूसरे से जोड़ दिया है। अंग्रेज़ों के मार्ग,
तब वहां भारत की विचारधारा प्रवाहित हुई थी, और ईसाई धर्मावलम्बी जिस सभ्यता की डींग हांक रहे हैं, वह भी भारतीय विचारों के छोटे-छोट कणों के संग्रह के सिवा और कुछ नहीं। बौद्व धर्म, अपनी समस्त महानता के साथ जिसकी विद्रोही संतान है और ईसाई धर्म जिसकी नगण्य नकल मात्र है, वहीं हमारा धर्म है। युगचक्र फिर घूमा है, वैसा ही समय फिर आया है, इंग्लैंड की प्रबल शक्ति ने भूमंडल के भिन्न-भिन्न भागों को फिर एक दूसरे से जोड़ दिया है। अंग्रेज़ों के मार्ग,