रोमन जाति के मार्गों की तरह केवल स्थल भाग ही में नहीं, अतल महासागरों के सब भागों मंे भी दौड़ रहे हैं। संसार के सभी भाग एक दूसरे से जुड़ गए हैं और विद्युत-शक्ति नवसंदेशवाहक की भांति अपना अद्भुत नाटक खेल रही है। इन अनुकूल अवस्थाओं को प्राप्त कर भारत फिर जाग रहा है और संसार की उन्नति तथा सारी सभ्यता को अपना योगदान देने के लिए वह तैयार है। इसी के फलस्वरूप प्रकृति ने मानो ज़बर्दस्ती मुझे धर्म का प्रचार करने के लिए इंग्लैंड और
रोमन जाति के मार्गों की तरह केवल स्थल भाग ही में नहीं, अतल महासागरों के सब भागों मंे भी दौड़ रहे हैं। संसार के सभी भाग एक दूसरे से जुड़ गए हैं और विद्युत-शक्ति नवसंदेशवाहक की भांति अपना अद्भुत नाटक खेल रही है। इन अनुकूल अवस्थाओं को प्राप्त कर भारत फिर जाग रहा है और संसार की उन्नति तथा सारी सभ्यता को अपना योगदान देने के लिए वह तैयार है। इसी के फलस्वरूप प्रकृति ने मानो ज़बर्दस्ती मुझे धर्म का प्रचार करने के लिए इंग्लैंड और