अमेरिका भेजा। हममें से हर एक को यह अनुभव करना चाहिए था कि प्रचार का समय आ गया है। चारों ओर शुभ लक्षण दीख रहे हैं और भारतीय आध्यात्मिक और दार्शनिक विचारों की फिर से सारे संसार पर विजय होगी। अतएव हमारे सामने
92 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
समस्या दिन-दिन बृहत्तर धारण कर रही है। क्या हमें केवल अपने ही देश को जगाना होगा? नहीं, यह तो एक तुच्छ बात है, मैं एक कल्पनाशील मुनष्य हूं-मेरी यह भावना है कि हिन्दू जाति सारे संसार पर विजय प्राप्त करेगी।’’ (पृष्ठ 170)
अमेरिका भेजा। हममें से हर एक को यह अनुभव करना चाहिए था कि प्रचार का समय आ गया है। चारों ओर शुभ लक्षण दीख रहे हैं और भारतीय आध्यात्मिक और दार्शनिक विचारों की फिर से सारे संसार पर विजय होगी। अतएव हमारे सामने
92 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
समस्या दिन-दिन बृहत्तर धारण कर रही है। क्या हमें केवल अपने ही देश को जगाना होगा? नहीं, यह तो एक तुच्छ बात है, मैं एक कल्पनाशील मुनष्य हूं-मेरी यह भावना है कि हिन्दू जाति सारे संसार पर विजय प्राप्त करेगी।’’ (पृष्ठ 170)