थियोसाॅफी की प्रतिनिधि श्रीमती एनी बेसेन्ट तथा चक्रवर्ती थे। इन सबमें मजूमदार मेरे पुराने मित्र थे और चक्रवर्ती मेरे नाम से परिचित थे। शानदार जुलूस के बाद हम सब लोग मंच पर बैठाए गए। कल्पना करो, नीचे एक बड़ा हाॅल और ऊपर एक बहुुत बड़ी गैलरी, दोनों में छःसात हज़ार आदमी, इस देश के चुने हुए सुसंस्कृत स्त्री-पुरूष है, खचाखच भरे हैं तथा मंच पर संसार की सभी जातियों के बड़े-बड़े विद्वान एकत्र है। और मुझे, जिसने अब तक कभी सार्वजनिक सभा में भाषण नहीं दिया,
थियोसाॅफी की प्रतिनिधि श्रीमती एनी बेसेन्ट तथा चक्रवर्ती थे। इन सबमें मजूमदार मेरे पुराने मित्र थे और चक्रवर्ती मेरे नाम से परिचित थे। शानदार जुलूस के बाद हम सब लोग मंच पर बैठाए गए। कल्पना करो, नीचे एक बड़ा हाॅल और ऊपर एक बहुुत बड़ी गैलरी, दोनों में छःसात हज़ार आदमी, इस देश के चुने हुए सुसंस्कृत स्त्री-पुरूष है, खचाखच भरे हैं तथा मंच पर संसार की सभी जातियों के बड़े-बड़े विद्वान एकत्र है। और मुझे, जिसने अब तक कभी सार्वजनिक सभा में भाषण नहीं दिया,