योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

समय खूब करतल-घ्वनि हुई। वे सब अपने भाषण तैयार करके आए थे। मैं अबोध था और बिना किसी प्रकार की तैयारी के बैठा था। किन्तु मैं देवी सरस्वती को प्रणाम करके सामने आया और डाॅ. बरोज ने मेरा परिचय दिया। मैंने एक छोटा-सा भाषण दिया। मैंने इस प्रकार सम्बोधन किया, ‘‘अमेरिका निवासी बहनो और भाइयों!’’ इसके साथ ही दो मिनट एक ऐसी घोर करतल ध्वनि हुई कि कान में अंगुली देते ही बनी। फिर मैंने आरम्भ किया जब अपना भाषण समाप्त कर बैठा, तो भावावेग


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समय खूब करतल-घ्वनि हुई। वे सब अपने भाषण तैयार करके आए थे। मैं अबोध था और बिना किसी प्रकार की तैयारी के बैठा था। किन्तु मैं देवी सरस्वती को प्रणाम करके सामने आया और डाॅ. बरोज ने मेरा परिचय दिया। मैंने एक छोटा-सा भाषण दिया। मैंने इस प्रकार सम्बोधन किया, ‘‘अमेरिका निवासी बहनो और भाइयों!’’ इसके साथ ही दो मिनट एक ऐसी घोर करतल ध्वनि हुई कि कान में अंगुली देते ही बनी। फिर मैंने आरम्भ किया जब अपना भाषण समाप्त कर बैठा, तो भावावेग


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