योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

से मानो मैं अवश हो गया था। देसरे दिन सब समाचार पत्रों में छपा कि मेरी ही वक्तृता उस दिन सबसे अधिक हृदयस्पर्शी थी। पूरा अमेरिका मुझे जान गया।...उस दिन से मैं विख्यात हो गया और जिस दिन मैंने हिन्दू धर्म पर अपनी वक्तृता पढ़ी, उसी दिन तो हाॅल में इतनी अधिक भीड़ थी, जितनी पहले कभी न थी। एक समाचार-पत्र का कुछ अंश उद्वत करता हूं, ‘‘केवल महिलाएं ही महिलाएं कोने-कोने में, जहां देखो वहां ठसाठस भरी हुई दिखाई देती थी। अन्य सब सक्तृताओं


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से मानो मैं अवश हो गया था। देसरे दिन सब समाचार पत्रों में छपा कि मेरी ही वक्तृता उस दिन सबसे अधिक हृदयस्पर्शी थी। पूरा अमेरिका मुझे जान गया।...उस दिन से मैं विख्यात हो गया और जिस दिन मैंने हिन्दू धर्म पर अपनी वक्तृता पढ़ी, उसी दिन तो हाॅल में इतनी अधिक भीड़ थी, जितनी पहले कभी न थी। एक समाचार-पत्र का कुछ अंश उद्वत करता हूं, ‘‘केवल महिलाएं ही महिलाएं कोने-कोने में, जहां देखो वहां ठसाठस भरी हुई दिखाई देती थी। अन्य सब सक्तृताओं


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