के समाप्त होने तक वे किसी प्रकार धैर्य धारण कर विवेकानन्द की वक्तृता की बाट जोहती रहीं इत्यादि।’’
भारत के संन्यासी ने भद्र नारियों तथा पुरूषों! (लेडीज़ एण्ड जेटलमैन) से सम्बोधित करने की लीक तोड़ी थी, ‘बहनों और भाइयों! (सिस्टर्स एण्ड ब्रदर्स) में जो अपनत्व था, सतत तालियों से उसी का स्वागत हुआ था। फिर ये शब्द मात्र नहीं थे, इनके पीछे सर्व सम्भावना का सिद्वान्त, हृदय की उदारता और विश्वास की गरिमा थी। और फिर संगीतमय स्वर में भाषण का आरम्भ हुआः
के समाप्त होने तक वे किसी प्रकार धैर्य धारण कर विवेकानन्द की वक्तृता की बाट जोहती रहीं इत्यादि।’’
भारत के संन्यासी ने भद्र नारियों तथा पुरूषों! (लेडीज़ एण्ड जेटलमैन) से सम्बोधित करने की लीक तोड़ी थी, ‘बहनों और भाइयों! (सिस्टर्स एण्ड ब्रदर्स) में जो अपनत्व था, सतत तालियों से उसी का स्वागत हुआ था। फिर ये शब्द मात्र नहीं थे, इनके पीछे सर्व सम्भावना का सिद्वान्त, हृदय की उदारता और विश्वास की गरिमा थी। और फिर संगीतमय स्वर में भाषण का आरम्भ हुआः