‘‘अपने जिस सौहार्द्र और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया है, उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण नहीं हो रहा है। संसार में सन्यासियों की सबसे प्राचीन परंपरा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूं, धर्मों की माता की आरे से धन्यवाद देता हूं।’’
अमेरिका जाने से पहले विवेकानन्द ने समूचे देश का भ्रमण किया था, विद्वानों से बातचीत और शास्त्र एवं इतिहास के अध्ययन द्वारा उसके
‘‘अपने जिस सौहार्द्र और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया है, उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण नहीं हो रहा है। संसार में सन्यासियों की सबसे प्राचीन परंपरा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूं, धर्मों की माता की आरे से धन्यवाद देता हूं।’’
अमेरिका जाने से पहले विवेकानन्द ने समूचे देश का भ्रमण किया था, विद्वानों से बातचीत और शास्त्र एवं इतिहास के अध्ययन द्वारा उसके