योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

अमर, आत्मा मुक्त, आनन्दमय और नित्य! आप जड़ नहीं हैं। आप शरीर नहीं हैं, जड़ तो आपका दास है, न कि आप हैं दास जड़ के।’’

ईसाई पादरी हमें मूर्तिपूजक बताकर, हमें जंगली और असभ्य कहकर हमारी

95 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

निंदा करते थे। विवेकानन्द ने विनोद और उपहास में इस निन्दा का जो उत्तर दिया वह सुनने लायक हैः

‘‘बचपन की एक बात मुझे याद आती है। एक ईसाई पादरी कुछ मनुष्यों की भीड़ जमा करके धर्मोपदेश कर रहा था। बहुतेरी मजे़दार बातों के साथ वह पादरी यह भी कह गया,


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अमर, आत्मा मुक्त, आनन्दमय और नित्य! आप जड़ नहीं हैं। आप शरीर नहीं हैं, जड़ तो आपका दास है, न कि आप हैं दास जड़ के।’’

ईसाई पादरी हमें मूर्तिपूजक बताकर, हमें जंगली और असभ्य कहकर हमारी

95 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

निंदा करते थे। विवेकानन्द ने विनोद और उपहास में इस निन्दा का जो उत्तर दिया वह सुनने लायक हैः

‘‘बचपन की एक बात मुझे याद आती है। एक ईसाई पादरी कुछ मनुष्यों की भीड़ जमा करके धर्मोपदेश कर रहा था। बहुतेरी मजे़दार बातों के साथ वह पादरी यह भी कह गया,


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