ठसके विपरीत भुवनेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थी। नरेन्द्र के बाद दो छोटे भाई और दो बहनें और थी। मां बेटे-बेटियों की स्नेह-पूर्वक देख-भाल करती थी। रामायण, महाभारत, भागवत आदि पुराणों का पाठ वे नियमित रूप से किया करती थी। और पति तथा पुत्रों से चर्चा चलाकर तत्कालीन हलचलों और आधुनिक विचारधारा से भी अवगत रहती थी। नरेन्द्र को मां के मुख से रामायण और महाभारत की कहानियां बड़े चाव से सुनाया करती थी। दत्त भवन में प्रायः प्रतिदिन
ठसके विपरीत भुवनेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थी। नरेन्द्र के बाद दो छोटे भाई और दो बहनें और थी। मां बेटे-बेटियों की स्नेह-पूर्वक देख-भाल करती थी। रामायण, महाभारत, भागवत आदि पुराणों का पाठ वे नियमित रूप से किया करती थी। और पति तथा पुत्रों से चर्चा चलाकर तत्कालीन हलचलों और आधुनिक विचारधारा से भी अवगत रहती थी। नरेन्द्र को मां के मुख से रामायण और महाभारत की कहानियां बड़े चाव से सुनाया करती थी। दत्त भवन में प्रायः प्रतिदिन