योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

दोपहर को रामायण और महाभारत की कथा होती थी। कोई बुढ़िया अथवा खुद भुवनेश्वरी देवी पढ़ती और मुहल्ले की दूसरी औरतें सुनती। नरेन्द्र वैसे चंचल स्वभाव का बालक था, लेकिन इस छोटी-सी महिला सभा में वह चुपचाप और शान्त बैठा रहता था। इन ग्रन्थों की कहानियांे का उसके मन पर गम्भीर प्रभाव पड़ता, इनके पात्र उसकी कल्पना में सजीव हो उठते और वह घंटों मंत्रमुग्ध-सा बैठा सुना करता।

रामायण सुनते-सुनते नरेन्द्र को सीता और राम से इतनी श्रद्वा


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दोपहर को रामायण और महाभारत की कथा होती थी। कोई बुढ़िया अथवा खुद भुवनेश्वरी देवी पढ़ती और मुहल्ले की दूसरी औरतें सुनती। नरेन्द्र वैसे चंचल स्वभाव का बालक था, लेकिन इस छोटी-सी महिला सभा में वह चुपचाप और शान्त बैठा रहता था। इन ग्रन्थों की कहानियांे का उसके मन पर गम्भीर प्रभाव पड़ता, इनके पात्र उसकी कल्पना में सजीव हो उठते और वह घंटों मंत्रमुग्ध-सा बैठा सुना करता।

रामायण सुनते-सुनते नरेन्द्र को सीता और राम से इतनी श्रद्वा


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