योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

तीन मिनट के भाषण में इन्हीं पादरियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा:

‘‘ईसाइयों को सत् आलोचना सुनने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए और मुझे विश्वास है कि यदि मैं आप लोगांे की कुछ आलोचना करूं तो आप बुरा न मानंेगे। ईसाई लोग जो मूर्तिपूजकों की आत्मा का उद्वार करने के निमित्त अपने धर्म प्रचारकों को भेजने के लिए इतने उत्सुक रहते हैं, उनके शरीरों भी भूख से बचाने के लिए कुछ क्यों नहीं करते? भारतवर्ष में जब भयानक अकाल पड़ा था,


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तीन मिनट के भाषण में इन्हीं पादरियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा:

‘‘ईसाइयों को सत् आलोचना सुनने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए और मुझे विश्वास है कि यदि मैं आप लोगांे की कुछ आलोचना करूं तो आप बुरा न मानंेगे। ईसाई लोग जो मूर्तिपूजकों की आत्मा का उद्वार करने के निमित्त अपने धर्म प्रचारकों को भेजने के लिए इतने उत्सुक रहते हैं, उनके शरीरों भी भूख से बचाने के लिए कुछ क्यों नहीं करते? भारतवर्ष में जब भयानक अकाल पड़ा था,


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