योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मैं कुछ समाचार पत्र और पत्रिकाएं जो मेरे पास हैं, उनसे उद्वत करके लिखता हूं। मैं डींग नहीं हांकना चाहता, परन्तु आपके प्रेम के कारण, आपमें विश्वास करके मैं यह अवश्य कहूंगा कि किसी हिन्दू ने अमेरिका को ऐसा प्रभावित नहीं किया, और मेरे आने से यदि कुछ भी न हुआ, तो इतना अवश्य हुआ कि अमेरिकनों को यह मालूम हो गया कि भारत में आज भी ऐसे मनुष्य उत्पन्न हो रहे हैं, जिनके चरणों में सभ्य से सभ्य राष्ट्र की नीति और धर्म का पाठ पढ़ सकते


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मैं कुछ समाचार पत्र और पत्रिकाएं जो मेरे पास हैं, उनसे उद्वत करके लिखता हूं। मैं डींग नहीं हांकना चाहता, परन्तु आपके प्रेम के कारण, आपमें विश्वास करके मैं यह अवश्य कहूंगा कि किसी हिन्दू ने अमेरिका को ऐसा प्रभावित नहीं किया, और मेरे आने से यदि कुछ भी न हुआ, तो इतना अवश्य हुआ कि अमेरिकनों को यह मालूम हो गया कि भारत में आज भी ऐसे मनुष्य उत्पन्न हो रहे हैं, जिनके चरणों में सभ्य से सभ्य राष्ट्र की नीति और धर्म का पाठ पढ़ सकते


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