हैं। क्या आप नहीं समझते कि हिन्दू राष्ट्र को अपने संन्यासी यहां भेजने के लिए पर्याप्त कारण है।’’
‘‘कुछ पत्रिकाओं के अंश मैं नीचे उद्वत करता हूं।’’
‘‘अधिकांश संक्षिप्त भाषण वाकपटुत्वपूर्ण होते हुए भी किसी ने भी धर्म-महासभा के ताप्पर्य एवं उसकी सीमाओं का इतने अच्छे ढंग से वर्णन नहीं किया, जैसा कि उस हिन्दू संन्यासी ने। मैं उनका भाषण पूरा-पूरा उद्वत करता हूं, परन्तु श्रोताओं पर उसका क्या प्रभाव पड़ा, इसके बारे में मैं
हैं। क्या आप नहीं समझते कि हिन्दू राष्ट्र को अपने संन्यासी यहां भेजने के लिए पर्याप्त कारण है।’’
‘‘कुछ पत्रिकाओं के अंश मैं नीचे उद्वत करता हूं।’’
‘‘अधिकांश संक्षिप्त भाषण वाकपटुत्वपूर्ण होते हुए भी किसी ने भी धर्म-महासभा के ताप्पर्य एवं उसकी सीमाओं का इतने अच्छे ढंग से वर्णन नहीं किया, जैसा कि उस हिन्दू संन्यासी ने। मैं उनका भाषण पूरा-पूरा उद्वत करता हूं, परन्तु श्रोताओं पर उसका क्या प्रभाव पड़ा, इसके बारे में मैं