केवल इतना कह सकता हूं कि वे दैवी अधिकार से सम्पन्न वक्ता हैं और उनका शक्तिमान तेजस्वी मुख तथा उनके पीले गेरूए वस्त्र, उनके गम्भीर तथा लयात्मक वाक्यों से कुछ कम आकर्षक न थे।’’ (न्यूयार्क क्रिटिक)।
‘‘उन्होंने गिरजों और क्लबों में इतनी बार भाषण दिया है कि उनके धर्म से अब हम भी परिचित हो गए है।...उनकी संस्कृति, उनकी वाक्पटुता, उनके आकर्षण एवं अद्भुत व्यक्तित्व ने हमें हिन्दू सभ्यता का एक नया आलोक दिया है। ... उनके सुन्दर
केवल इतना कह सकता हूं कि वे दैवी अधिकार से सम्पन्न वक्ता हैं और उनका शक्तिमान तेजस्वी मुख तथा उनके पीले गेरूए वस्त्र, उनके गम्भीर तथा लयात्मक वाक्यों से कुछ कम आकर्षक न थे।’’ (न्यूयार्क क्रिटिक)।
‘‘उन्होंने गिरजों और क्लबों में इतनी बार भाषण दिया है कि उनके धर्म से अब हम भी परिचित हो गए है।...उनकी संस्कृति, उनकी वाक्पटुता, उनके आकर्षण एवं अद्भुत व्यक्तित्व ने हमें हिन्दू सभ्यता का एक नया आलोक दिया है। ... उनके सुन्दर