पर उतर आते थे। दूसरे ईसाई मिशनरी विवेकानन्द की लोकप्रियता को क्षति पहुंचाने के लिए निकृष्ट तत्वों की हुल्लड़बाज़ी को न सिर्फ प्रोत्साहन देते थे बल्कि उन्हें सिखा-पढ़ाकर दर्शकों तथा श्रोताओं में भेजते थे। विवेकानन्द की तीव्र दृष्टि ने इन निकृष्ट तत्वों और मिशनरियों के षड्यंत्र को पहचान लिया और उसके पीछे इन्हें साम्राज्यवाद का हाथ दिखाई दिया। लेकिन वह घबराने वाले व्यक्ति न थे। उन्होंने यहां भी स्वभावगत साहस तथा निर्भीकता का परिचय दिया। रोमां रोलां लिखते हैं:
पर उतर आते थे। दूसरे ईसाई मिशनरी विवेकानन्द की लोकप्रियता को क्षति पहुंचाने के लिए निकृष्ट तत्वों की हुल्लड़बाज़ी को न सिर्फ प्रोत्साहन देते थे बल्कि उन्हें सिखा-पढ़ाकर दर्शकों तथा श्रोताओं में भेजते थे। विवेकानन्द की तीव्र दृष्टि ने इन निकृष्ट तत्वों और मिशनरियों के षड्यंत्र को पहचान लिया और उसके पीछे इन्हें साम्राज्यवाद का हाथ दिखाई दिया। लेकिन वह घबराने वाले व्यक्ति न थे। उन्होंने यहां भी स्वभावगत साहस तथा निर्भीकता का परिचय दिया। रोमां रोलां लिखते हैं: