‘‘तरूण अमेरिकी गणतंत्र की दुर्दम शक्ति के प्रति उनमें पहले-पहल जो आकर्षण और आदर उपजा था, वह मन्द पड़ चुका था। उसकी क्रूरता, अमानुषिकता, क्षुद्रता, कट्टरता, प्रकाण्ड मूर्खता एवं दम्भी मूढ़ता के लिए विवेकानन्द के मन में सहसा घृणा जाग उठी थी। जो विचारशील हैं, आस्थावान हैं और जीवन को उस दृष्टि से नहीं देखते, जिससे मानव जाति का अवतंस यह राष्ट्र देखता है, उनके विषय में यह कितने निर्लज्ज आत्मविश्वास के साथ अपनी राय देता है...तब
‘‘तरूण अमेरिकी गणतंत्र की दुर्दम शक्ति के प्रति उनमें पहले-पहल जो आकर्षण और आदर उपजा था, वह मन्द पड़ चुका था। उसकी क्रूरता, अमानुषिकता, क्षुद्रता, कट्टरता, प्रकाण्ड मूर्खता एवं दम्भी मूढ़ता के लिए विवेकानन्द के मन में सहसा घृणा जाग उठी थी। जो विचारशील हैं, आस्थावान हैं और जीवन को उस दृष्टि से नहीं देखते, जिससे मानव जाति का अवतंस यह राष्ट्र देखता है, उनके विषय में यह कितने निर्लज्ज आत्मविश्वास के साथ अपनी राय देता है...तब