योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

ऐसे-ऐसे गीदड़ और भेड़िये जिसका प्रतिनिधित्व करें, उस सभ्यता को उन्होंने हन डाला, भयंकर हाय-तोबा मची। सैकड़ों अशान्त श्रोता सभा-भवन छोड़कर चल दिए और अखबारों ने लाल-पीली आंखे दिखाई।

वे झूठी ईसाइयत और पाखंड से विशेषतया खिन्न थे।

‘‘आप जितनी चाहें शेखी बघारें, पर तलवार के बिना आपकी ईसायत कहीं सफल हुई है? आपका धर्म ऐश्वर्य का लोभ दिखाकर प्रचारित किया जाता है। इस देश में मैंने जो कुछ सुना सब ढोंग है। यह सब समृद्वि-यही सब क्या खीष्ट की देन है? जो खी्रष्ट को पुकारते हैं,


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ऐसे-ऐसे गीदड़ और भेड़िये जिसका प्रतिनिधित्व करें, उस सभ्यता को उन्होंने हन डाला, भयंकर हाय-तोबा मची। सैकड़ों अशान्त श्रोता सभा-भवन छोड़कर चल दिए और अखबारों ने लाल-पीली आंखे दिखाई।

वे झूठी ईसाइयत और पाखंड से विशेषतया खिन्न थे।

‘‘आप जितनी चाहें शेखी बघारें, पर तलवार के बिना आपकी ईसायत कहीं सफल हुई है? आपका धर्म ऐश्वर्य का लोभ दिखाकर प्रचारित किया जाता है। इस देश में मैंने जो कुछ सुना सब ढोंग है। यह सब समृद्वि-यही सब क्या खीष्ट की देन है? जो खी्रष्ट को पुकारते हैं,


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