क्या वे पैसा बटोरने के अतिरिक्त कुछ नहीं जानते? खी्रष्ट तुम्हारे घर में एक ईंट भी तकिया लगाने योग्य नहीं पाएंगे। तुम ईसाई नहीं हो, खी्रष्ट की शरण में लौटो।’’ (विवेकानन्द, पृष्ठ 85)
एक सार्वजनिक भाषण से विरोध का तूफान और भी तेज़ हो गया। इधर अमेरिका में मिशनरी और उनके अखबार उन्हें ठग और कपटी बताकर बदनाम कर रहे थे। वे लोगों के घरों में जा-जाकर कहते थे कि भारत में इसका पत्नियों का हरम है और बच्चों की आधी सेना है। वह तो यहां
क्या वे पैसा बटोरने के अतिरिक्त कुछ नहीं जानते? खी्रष्ट तुम्हारे घर में एक ईंट भी तकिया लगाने योग्य नहीं पाएंगे। तुम ईसाई नहीं हो, खी्रष्ट की शरण में लौटो।’’ (विवेकानन्द, पृष्ठ 85)
एक सार्वजनिक भाषण से विरोध का तूफान और भी तेज़ हो गया। इधर अमेरिका में मिशनरी और उनके अखबार उन्हें ठग और कपटी बताकर बदनाम कर रहे थे। वे लोगों के घरों में जा-जाकर कहते थे कि भारत में इसका पत्नियों का हरम है और बच्चों की आधी सेना है। वह तो यहां