आकर खामख्वाह संन्यासी बन गया है। उधर भारत में ये पादरी लोग और धर्म-महासभ में ब्रह्मसमाज के प्रतिनिधि प्रतापचन्द्र मजूमदार जो विवेकानन्द की असाधारण ख्याति के कारण द्वेष की आग में जल-भुन रहे थे, यह मिथ्या प्रचार कर रहे थे कि स्वामी जी अमेरिका के बड़े-बड़े होटलों में रहते हैं, सब चीज़ खाते-पीते हैं और विलासिता का जीवन बिता रहे हैं। रूढ़िवादी और कट्टरपंथी हिन्दुओं ने भी इस मिथ्या प्रचार को बढ़ावा दिया। विवेकानन्द के शिष्यों तथा
आकर खामख्वाह संन्यासी बन गया है। उधर भारत में ये पादरी लोग और धर्म-महासभ में ब्रह्मसमाज के प्रतिनिधि प्रतापचन्द्र मजूमदार जो विवेकानन्द की असाधारण ख्याति के कारण द्वेष की आग में जल-भुन रहे थे, यह मिथ्या प्रचार कर रहे थे कि स्वामी जी अमेरिका के बड़े-बड़े होटलों में रहते हैं, सब चीज़ खाते-पीते हैं और विलासिता का जीवन बिता रहे हैं। रूढ़िवादी और कट्टरपंथी हिन्दुओं ने भी इस मिथ्या प्रचार को बढ़ावा दिया। विवेकानन्द के शिष्यों तथा