पसन्द नहीं था। उसने ब्याह का ऐसा भयानक चित्र खींचा कि नरेन्द्र बेचैन हो उठा और रोता हुआ मां के पास आया। मां ने बेटे से रोने का कारण पूछा तो उसने कोचवान की बात सुनाकर कहा, ‘‘मां, मैं सीताराम की पूजा कैसे करूं? सीता तो राम की पत्नी थी।’’ मां ने उसे गोद में बैठाकर आंसु पोंछे और बड़े दुलार से कहा, ‘‘सीताराम की पूजा न भी करो तो कोई हानि नहीं। कल से शिव की पूजा करना, बेटा!’’
मां जब किसी काम में व्यस्त हो गई तो नरेन्द्र दबे पांव ऊपर गया। सीताराम की मूर्ति,
पसन्द नहीं था। उसने ब्याह का ऐसा भयानक चित्र खींचा कि नरेन्द्र बेचैन हो उठा और रोता हुआ मां के पास आया। मां ने बेटे से रोने का कारण पूछा तो उसने कोचवान की बात सुनाकर कहा, ‘‘मां, मैं सीताराम की पूजा कैसे करूं? सीता तो राम की पत्नी थी।’’ मां ने उसे गोद में बैठाकर आंसु पोंछे और बड़े दुलार से कहा, ‘‘सीताराम की पूजा न भी करो तो कोई हानि नहीं। कल से शिव की पूजा करना, बेटा!’’
मां जब किसी काम में व्यस्त हो गई तो नरेन्द्र दबे पांव ऊपर गया। सीताराम की मूर्ति,