योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

में लाया जाए। अतएव गर्म लोहे पर चोट करने की योजना स्थिर करके उन्होंने 9 अपै्रल, 1894 को आलासिंगा पेरूमल के नाम अपने पत्र में लिखा:

‘‘निस्संदेह कट्टर पादरी मेरे विरूद्व हैं, और मुझसे मुठभेड़ करना कठिन जानकर हर प्रकार से वे मेरी निंदा करते हैं और मुझे बदनाम करने एवं मेरा विरोध करने में भी नहीं हिचकिचाते। और इसमें मजूमदार उनकी सहायता कर रहे हैं। वह द्वेष के मारे पागल हो गया लगता है। उसने उन लोगों से कहा कि मैं बहुत बड़ा


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में लाया जाए। अतएव गर्म लोहे पर चोट करने की योजना स्थिर करके उन्होंने 9 अपै्रल, 1894 को आलासिंगा पेरूमल के नाम अपने पत्र में लिखा:

‘‘निस्संदेह कट्टर पादरी मेरे विरूद्व हैं, और मुझसे मुठभेड़ करना कठिन जानकर हर प्रकार से वे मेरी निंदा करते हैं और मुझे बदनाम करने एवं मेरा विरोध करने में भी नहीं हिचकिचाते। और इसमें मजूमदार उनकी सहायता कर रहे हैं। वह द्वेष के मारे पागल हो गया लगता है। उसने उन लोगों से कहा कि मैं बहुत बड़ा


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