वीरता के साथ काम करते चले जाएं। मेरा तो पूर्ण विश्वास है कि संसार की कोई
103 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भी शक्ति किसी से उस वस्तु को अलग नहीं रख सकती, जिसके लिए वह वास्तव में योग्य हों। अतीत तो हमारा गौरवमय था ही, पर मुझे हार्दिक विश्वास है कि भविष्य और भी गौरवमय होगा।’’ (वि. सा., तृतीय खंड, पृष्ठ 332)
अपनी कमियों को समझे और दूसरों से सीखे बिना आगे बढ़ना सम्भव नहीं। लेकिन आत्मालोचना अपनों ही के सम्मुख की जाती है,
वीरता के साथ काम करते चले जाएं। मेरा तो पूर्ण विश्वास है कि संसार की कोई
103 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भी शक्ति किसी से उस वस्तु को अलग नहीं रख सकती, जिसके लिए वह वास्तव में योग्य हों। अतीत तो हमारा गौरवमय था ही, पर मुझे हार्दिक विश्वास है कि भविष्य और भी गौरवमय होगा।’’ (वि. सा., तृतीय खंड, पृष्ठ 332)
अपनी कमियों को समझे और दूसरों से सीखे बिना आगे बढ़ना सम्भव नहीं। लेकिन आत्मालोचना अपनों ही के सम्मुख की जाती है,