योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पर वे जहां भी गए वहीं उनका भव्य स्वागत हुआ। अपने मद्रास के भाषण में अपने इन्हीं देशवासियों के सम्मुख बोलते हुए उन्होंने दिल के फुोले इस प्रकार फोड़े:

‘‘मैं समझता हूं कि मुझमें अनेक दोषों के होते हुए थोड़ा साहस है। मैं भारत से पाश्चात्य देशों में कुछ संदेश ले गया था, और उसे मैंने निर्भीकता से अमेरिका और इंग्लैंड के सामने प्रकट किया। आज का विषय आरम्भ करने के पूर्व मैं साहसपूर्वक तुम लोगों से कहना चाहता हूं। कुछ दिनों से


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पर वे जहां भी गए वहीं उनका भव्य स्वागत हुआ। अपने मद्रास के भाषण में अपने इन्हीं देशवासियों के सम्मुख बोलते हुए उन्होंने दिल के फुोले इस प्रकार फोड़े:

‘‘मैं समझता हूं कि मुझमें अनेक दोषों के होते हुए थोड़ा साहस है। मैं भारत से पाश्चात्य देशों में कुछ संदेश ले गया था, और उसे मैंने निर्भीकता से अमेरिका और इंग्लैंड के सामने प्रकट किया। आज का विषय आरम्भ करने के पूर्व मैं साहसपूर्वक तुम लोगों से कहना चाहता हूं। कुछ दिनों से


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