योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



घर में जाने कब से चले आ रहे देशाचर और लोकाचार के नियमों को नरेन्द्र बचपन ही से नहीं मानता था। इसके लिए मां अगर झुंझलाती या डांटती-डपटती, तो वह निरीह भाव से पूछता-भात की थाली छूकर बदन पर हाथ लगाने से क्या होता है? बायें हाथ से गिलास उठाकर जल पीने से हाथ क्यों धोना पड़ता है? हाथ में तो जूठन नहीं लगती? मां इन प्रश्नों का कोई संतोषजनक उत्तर न दे पाती तो नरेन्द्र उद्दंड हो उठता और नियमांे का उल्लंघन करता।

विश्वनाथ के मुवक्किलों


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घर में जाने कब से चले आ रहे देशाचर और लोकाचार के नियमों को नरेन्द्र बचपन ही से नहीं मानता था। इसके लिए मां अगर झुंझलाती या डांटती-डपटती, तो वह निरीह भाव से पूछता-भात की थाली छूकर बदन पर हाथ लगाने से क्या होता है? बायें हाथ से गिलास उठाकर जल पीने से हाथ क्यों धोना पड़ता है? हाथ में तो जूठन नहीं लगती? मां इन प्रश्नों का कोई संतोषजनक उत्तर न दे पाती तो नरेन्द्र उद्दंड हो उठता और नियमांे का उल्लंघन करता।

विश्वनाथ के मुवक्किलों


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