में एक पठान भी था। नरेन्द्र के प्रति उसका विशेष स्नेह था। उके अपने की खबर सुनते ही नरेन्द्र दौड़ा जाता और उसकी गोद में बैठकर पंजाब और अफगानिस्तान के हाथियों और ऊंटों की कहानियां बड़े चाव से सुनता। कई बार वह उसके साथ जाने का अनुरोध करता था। वह मुसलमान सज्जन हंसते हुए कहता, ‘‘तुम दो अंगुल और बड़े हो जाओ, तब मैं तुम्हें अपने साथ ज़रूर ले जाऊंगा।’’ नरेन्द्र कभी-कभी अगले ही दिन पंजों के बल खड़ा होकर कहता, ‘‘देखिए, मैं रता भर में
में एक पठान भी था। नरेन्द्र के प्रति उसका विशेष स्नेह था। उके अपने की खबर सुनते ही नरेन्द्र दौड़ा जाता और उसकी गोद में बैठकर पंजाब और अफगानिस्तान के हाथियों और ऊंटों की कहानियां बड़े चाव से सुनता। कई बार वह उसके साथ जाने का अनुरोध करता था। वह मुसलमान सज्जन हंसते हुए कहता, ‘‘तुम दो अंगुल और बड़े हो जाओ, तब मैं तुम्हें अपने साथ ज़रूर ले जाऊंगा।’’ नरेन्द्र कभी-कभी अगले ही दिन पंजों के बल खड़ा होकर कहता, ‘‘देखिए, मैं रता भर में