अपने मद्रासवासी मित्रों को तार भेजा। यह बात थियोसाॅफिस्टों को मालूम हो गई और उनमें से एक ने लिखा, अब शैतान शीघ्र ही मर जाएगा, ईश्वर की कृपा से अच्छा ही हुआ। बला टली। तो क्या यही मेरे लिए रास्ता बना देना था? मैं ये बातें इस समय कहना नहीं चाहता था। किन्तु मेरे देशवासी यह सब जानने के इच्छुक थे, अतः कहनी पड़ी ...पर यह बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती। मैंने धर्म-महासभा में कई थियोसाॅफिस्टों को देखा। मैंने उनसे बातचीत करने और
अपने मद्रासवासी मित्रों को तार भेजा। यह बात थियोसाॅफिस्टों को मालूम हो गई और उनमें से एक ने लिखा, अब शैतान शीघ्र ही मर जाएगा, ईश्वर की कृपा से अच्छा ही हुआ। बला टली। तो क्या यही मेरे लिए रास्ता बना देना था? मैं ये बातें इस समय कहना नहीं चाहता था। किन्तु मेरे देशवासी यह सब जानने के इच्छुक थे, अतः कहनी पड़ी ...पर यह बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती। मैंने धर्म-महासभा में कई थियोसाॅफिस्टों को देखा। मैंने उनसे बातचीत करने और