मिलने-जुलने की चेष्टा की। उन लोगों ने जिस अवज्ञा-भरी-दृष्टि से मेरी ओर देखा, वह आज भी मेरी नज़रों पर नाच रही है-मानो वह कह रही थी, ‘यह कहां का क्षुद्र कीड़ा, यहां देवताओं के बीच में आ गया?’ मैं पूछता हूं क्या यही मेरे लिए रास्ता बना देना था? हां, तो धर्म-महासभा में मेरा बहुत नाम तथा यश हो गया, और तब से मेरे ऊपर अत्यधिक कार्यभार आ गया। पर प्रत्येक स्थान पर इन लोगों ने मुझे दबाने की चेष्टा की। थियोसाॅफिकल सोसाइटी के सदस्यों
मिलने-जुलने की चेष्टा की। उन लोगों ने जिस अवज्ञा-भरी-दृष्टि से मेरी ओर देखा, वह आज भी मेरी नज़रों पर नाच रही है-मानो वह कह रही थी, ‘यह कहां का क्षुद्र कीड़ा, यहां देवताओं के बीच में आ गया?’ मैं पूछता हूं क्या यही मेरे लिए रास्ता बना देना था? हां, तो धर्म-महासभा में मेरा बहुत नाम तथा यश हो गया, और तब से मेरे ऊपर अत्यधिक कार्यभार आ गया। पर प्रत्येक स्थान पर इन लोगों ने मुझे दबाने की चेष्टा की। थियोसाॅफिकल सोसाइटी के सदस्यों