को मेरे व्याख्यान सुनने की मनाही कर दी गई। यदि वे मेरी वक्तृता सुनने आते, तो वह सोसायटी के गुप्त (एसोटेरिक) विभाग का यह नियम ही है कि जो मनुष्य उक्त विभाग का सदस्य होता है, उसे केवल कुथर्मी और मोरिया (वे जो भी हों) के पास ही से शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती थी-अथवा इनके दृश्य प्रतिनिधि, मिस्टर जज और मिसेज बेसेन्ट से।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 102-5)
मित्र भेषधारी देश इन शत्रुओं को स्वामी जी ने भली-भांति पहचान लिया था। इनके
को मेरे व्याख्यान सुनने की मनाही कर दी गई। यदि वे मेरी वक्तृता सुनने आते, तो वह सोसायटी के गुप्त (एसोटेरिक) विभाग का यह नियम ही है कि जो मनुष्य उक्त विभाग का सदस्य होता है, उसे केवल कुथर्मी और मोरिया (वे जो भी हों) के पास ही से शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती थी-अथवा इनके दृश्य प्रतिनिधि, मिस्टर जज और मिसेज बेसेन्ट से।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 102-5)
मित्र भेषधारी देश इन शत्रुओं को स्वामी जी ने भली-भांति पहचान लिया था। इनके