में उम्र में सबसे छोटे होने पर भी प्राचीनतम श्रेष्ठतम सतय की जीती-जागती मूर्तिरूपी दूसरे किसी से भी कम न थे। दु्रत उन्नतिशील, उद्वत पाश्चात्य जगत् में दूत का काम करने के लिए अपनी
जन्मभूमि की गौरवपूर्ण कथाओं को न भूलकर भारत के संदेश की घोषणा की थी। शक्तिमान दृढ़ संकल्प तथा उद्यमशील स्वामी जी में अपने मत का समर्थन करने के लिए काफी क्षमता थी।’’
इस चापलूसी भरे शब्दजाल का यदि सूक्ष्म विवेचन किया जाए तो साम्राज्यवाद की इस
में उम्र में सबसे छोटे होने पर भी प्राचीनतम श्रेष्ठतम सतय की जीती-जागती मूर्तिरूपी दूसरे किसी से भी कम न थे। दु्रत उन्नतिशील, उद्वत पाश्चात्य जगत् में दूत का काम करने के लिए अपनी
जन्मभूमि की गौरवपूर्ण कथाओं को न भूलकर भारत के संदेश की घोषणा की थी। शक्तिमान दृढ़ संकल्प तथा उद्यमशील स्वामी जी में अपने मत का समर्थन करने के लिए काफी क्षमता थी।’’
इस चापलूसी भरे शब्दजाल का यदि सूक्ष्म विवेचन किया जाए तो साम्राज्यवाद की इस