धूर्त संतान ने धर्म-महासभा में स्वामी जी की वास्तविक भूमिका-राष्ट्रीय उद्देश्य की उपेक्षा करके सबसे पुराने धर्म की गौरवपूर्ण कथाओं ही को प्रमुखता प्रदान की है और इससे अगले पैरें मंे, जिसे यहां नकल करने की ज़रूरत नहीं, धर्म-महासभा में उनके व्याखानों को ‘अतुलनीय धार्मिक वार्ता’ बताया है, इससे अधिक कुछ नहीं। क्या यह खोल को रखकर गुदे को नष्ट करने और विवेकानन्द के अस्तित्व को मिटा देने ही की समझाी सोची चेष्टा नहीं? क्या यह
धूर्त संतान ने धर्म-महासभा में स्वामी जी की वास्तविक भूमिका-राष्ट्रीय उद्देश्य की उपेक्षा करके सबसे पुराने धर्म की गौरवपूर्ण कथाओं ही को प्रमुखता प्रदान की है और इससे अगले पैरें मंे, जिसे यहां नकल करने की ज़रूरत नहीं, धर्म-महासभा में उनके व्याखानों को ‘अतुलनीय धार्मिक वार्ता’ बताया है, इससे अधिक कुछ नहीं। क्या यह खोल को रखकर गुदे को नष्ट करने और विवेकानन्द के अस्तित्व को मिटा देने ही की समझाी सोची चेष्टा नहीं? क्या यह