दो अंगुली बड़ा हो गया हूं। अब आप मुझे अपने साथ ले चलिए।’’ मैं रात भर में दो अंगुली बड़ा हो गया हूं। अब आप मुझे अपने साथ ले चलिए।’’ इस पठान मुवक्किल से नरेन्द्र का अनुराग इतना बढ़ गया कि वह उसके हाथ से संदेश या फल लेकर निस्संकोच खा लेता था। विश्वनाथ कट्टर नहीं थे, उनकी दृष्टि में सभी जाति के लोग समान थे। इसलिए उनके नजदीक नरेन्द्र का मुसलमान के हाथ से खाना कोई अपराध नहीं था। पर परिवार के दूसरे लोगों इस पर बड़ी आपत्िा थी। वे
दो अंगुली बड़ा हो गया हूं। अब आप मुझे अपने साथ ले चलिए।’’ मैं रात भर में दो अंगुली बड़ा हो गया हूं। अब आप मुझे अपने साथ ले चलिए।’’ इस पठान मुवक्किल से नरेन्द्र का अनुराग इतना बढ़ गया कि वह उसके हाथ से संदेश या फल लेकर निस्संकोच खा लेता था। विश्वनाथ कट्टर नहीं थे, उनकी दृष्टि में सभी जाति के लोग समान थे। इसलिए उनके नजदीक नरेन्द्र का मुसलमान के हाथ से खाना कोई अपराध नहीं था। पर परिवार के दूसरे लोगों इस पर बड़ी आपत्िा थी। वे