तरह दृढ़ रहे। विरोधी समितियों और सम्प्रदायों ने उन्हें अपने साथ शामिल करने के लिए पहले प्रलोभन दिए और अंत में अनेक प्रकार के भय दिखाए। पर विवेकानन्द टस
106 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
से मस न हुए और उन्होंने निर्भीक स्वर में घोषित किया, ‘‘मैं सत्य का आग्रही और सत्य का उपासक हूं-सत्य कभी किसी भी स्थिति में मिथ्या से समझौता नहीं करेगा। यदि सारी दूनिया भी आज एक मत होकर मेरे विरूद्व खड़ी हो जाए तो भी सत्य ही की जीत होगी।’’
तरह दृढ़ रहे। विरोधी समितियों और सम्प्रदायों ने उन्हें अपने साथ शामिल करने के लिए पहले प्रलोभन दिए और अंत में अनेक प्रकार के भय दिखाए। पर विवेकानन्द टस
106 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
से मस न हुए और उन्होंने निर्भीक स्वर में घोषित किया, ‘‘मैं सत्य का आग्रही और सत्य का उपासक हूं-सत्य कभी किसी भी स्थिति में मिथ्या से समझौता नहीं करेगा। यदि सारी दूनिया भी आज एक मत होकर मेरे विरूद्व खड़ी हो जाए तो भी सत्य ही की जीत होगी।’’