उस समय अमेरिका की आबादी छः करोड़ के करीब थी। इसमें ईसाई एक तिहाई और थियोसाॅफिस्ट सिर्फ 650 थे। यह ईसाई भी कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट, प्रेसीबटेरियन तथा क्रिश्चियन साइंस इत्यादि सम्प्रदायों में बंटे हुए थे। वे चलते-पुर्जे दुनियादार लोग ही प्रायः इनके अनुयायी थे, जिन्हें धर्म के सूक्ष्म दार्शनिक तत्व से कुछ लेना-देना नहीं था, जो भोग-विलास का जीवन बिताते थे, जो नरक की आग में निरंतर जलने के भय से और स्वर्ग में अपनी सीट रिजर्व कराने के लिए धर्म को मानते थे,
उस समय अमेरिका की आबादी छः करोड़ के करीब थी। इसमें ईसाई एक तिहाई और थियोसाॅफिस्ट सिर्फ 650 थे। यह ईसाई भी कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट, प्रेसीबटेरियन तथा क्रिश्चियन साइंस इत्यादि सम्प्रदायों में बंटे हुए थे। वे चलते-पुर्जे दुनियादार लोग ही प्रायः इनके अनुयायी थे, जिन्हें धर्म के सूक्ष्म दार्शनिक तत्व से कुछ लेना-देना नहीं था, जो भोग-विलास का जीवन बिताते थे, जो नरक की आग में निरंतर जलने के भय से और स्वर्ग में अपनी सीट रिजर्व कराने के लिए धर्म को मानते थे,