योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

और यही वे लोग थे जो निकृष्टता, क्षुद्रता, प्रकाण्ड मूर्खता एवं दम्भी मूढ़ता को साकार बनाते थे और इन्हीं के प्रति विवेकानन्द के मन में सहसा घृणा जाग उठी थी। ईसाइयों में भी जो विचारशील श्रेष्ठ तत्व थे, वे विवेकानन्द का आदर करते थे, वे उनका भाषण सुनकर और उनसे विचारों का आदान-प्रदान करके प्रसन्न होते थे। अमेरिका में अधिकांश लोग वे थे जो डार्विन के विकासवाद, हरबर्ट स्पेंसर के अज्ञवाद तथा विज्ञान के नये आविष्कारों से प्रभावित थे,


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और यही वे लोग थे जो निकृष्टता, क्षुद्रता, प्रकाण्ड मूर्खता एवं दम्भी मूढ़ता को साकार बनाते थे और इन्हीं के प्रति विवेकानन्द के मन में सहसा घृणा जाग उठी थी। ईसाइयों में भी जो विचारशील श्रेष्ठ तत्व थे, वे विवेकानन्द का आदर करते थे, वे उनका भाषण सुनकर और उनसे विचारों का आदान-प्रदान करके प्रसन्न होते थे। अमेरिका में अधिकांश लोग वे थे जो डार्विन के विकासवाद, हरबर्ट स्पेंसर के अज्ञवाद तथा विज्ञान के नये आविष्कारों से प्रभावित थे,


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