देने के लिए आमंत्रित किया। विवेकानन्द निस्संकोच गए। जिस मानसिक स्थिति में ये लोग इस समय थे, विवेकानन्द बहुत पहले उससे गुज़र चुके थे। उनके भाषण और बाद में पूछे गए प्रश्नों के युक्तिसंगत उत्तरों से ये लोग इतने प्रभावित हुए कि दल के अनेक सदस्य विवेकानन्द के शिष्य बन गए। ‘लेनिन के धर्म पर विचार’ पुस्तक की भूमिका में लिखा है, ‘‘हम यहां यह बता दें कि अनीश्ववाद माक्र्सवाद के बिना अपूर्ण तथा अनिश्चित है। इस तर्क की पुष्टि पूंजीवादी
देने के लिए आमंत्रित किया। विवेकानन्द निस्संकोच गए। जिस मानसिक स्थिति में ये लोग इस समय थे, विवेकानन्द बहुत पहले उससे गुज़र चुके थे। उनके भाषण और बाद में पूछे गए प्रश्नों के युक्तिसंगत उत्तरों से ये लोग इतने प्रभावित हुए कि दल के अनेक सदस्य विवेकानन्द के शिष्य बन गए। ‘लेनिन के धर्म पर विचार’ पुस्तक की भूमिका में लिखा है, ‘‘हम यहां यह बता दें कि अनीश्ववाद माक्र्सवाद के बिना अपूर्ण तथा अनिश्चित है। इस तर्क की पुष्टि पूंजीवादी