स्वतंत्र विचारकों के आन्दोलन की अवनति से होती है। विज्ञान का भौतिकवाद जहां भी ऐतिहासिक भौतिकवाद अर्थात् माक्र्सवाद में विकसित नहीं हो पाता, वहीं उसका अंत आदर्शवाद (प्कमंसपेउ) में होता है।’’
साहित्य और दर्शन में प्रवीण इस दल के नेता राबर्ट इंगरसोल धर्म-विरोधी होने के बावजुद इतने लोकप्रिय वक्ता थे कि सिर्फ भाषण देकर लाखों रूपया कमा लेते थे। उक्त भाषण के बाद वे भी विवेकानन्द के मित्र बन गए । संन्यासी विवेकानन्द और भोगवादी
स्वतंत्र विचारकों के आन्दोलन की अवनति से होती है। विज्ञान का भौतिकवाद जहां भी ऐतिहासिक भौतिकवाद अर्थात् माक्र्सवाद में विकसित नहीं हो पाता, वहीं उसका अंत आदर्शवाद (प्कमंसपेउ) में होता है।’’
साहित्य और दर्शन में प्रवीण इस दल के नेता राबर्ट इंगरसोल धर्म-विरोधी होने के बावजुद इतने लोकप्रिय वक्ता थे कि सिर्फ भाषण देकर लाखों रूपया कमा लेते थे। उक्त भाषण के बाद वे भी विवेकानन्द के मित्र बन गए । संन्यासी विवेकानन्द और भोगवादी