योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

सर्कस के घोड़े की तरह नचाते फिर रहे हैं। उनका उद्देश्य धन कमान कदाचित् नहीं था। मित्रों द्वारा उन्होंने कम्पनी का अनुबंध रद््द कर दिया और न्यूयार्क में वेदान्त पर निःशुल्क क्लासें लेना आरम्भ किया। इससे भले ही आर्थिक हानि उठानी पड़ी, पर सबके सामने उनकी निःस्वार्थता प्रमाणित हो गई।

न्यूयार्क में ‘राजयोग’ पर उनके भाषण इतने लोकप्रिय हुए कि जिस दिन यह कार्यक्रम रहता था, उस दिन उनका छोटा-सा कमरा नगर के दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और अध्यापकों से भर जाता था। मई,


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सर्कस के घोड़े की तरह नचाते फिर रहे हैं। उनका उद्देश्य धन कमान कदाचित् नहीं था। मित्रों द्वारा उन्होंने कम्पनी का अनुबंध रद््द कर दिया और न्यूयार्क में वेदान्त पर निःशुल्क क्लासें लेना आरम्भ किया। इससे भले ही आर्थिक हानि उठानी पड़ी, पर सबके सामने उनकी निःस्वार्थता प्रमाणित हो गई।

न्यूयार्क में ‘राजयोग’ पर उनके भाषण इतने लोकप्रिय हुए कि जिस दिन यह कार्यक्रम रहता था, उस दिन उनका छोटा-सा कमरा नगर के दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और अध्यापकों से भर जाता था। मई,


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