योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

दिन ‘सहÛद्वीप उद्यान’ ( ज्ीवनेंदक प्ेसंदक च्ंता) में बिताए। वह सेन्ट लोरेन्स नदी के बीच उनकी एक शिष्या की सुन्दर कुटिया थी। वहां स्वामी जी अपने शिष्य-शिष्यायों के लिए अपने हाथ से भारतीय खाने तैयार करते और शाम को भोजन के बाद दो-ढाई घंटे उनकी क्लास लेते थे। इस संबंध में कुमारी एस. ई. ओल्डेन ने लिखा है:

‘‘इस गंधर्व राज्य में हमने आचार्यदेव के साथ सात सप्ताह दिव्य आनन्द से उनके अतींद्रिय राज्य के संदेशों-युक्त अपूर्व वचन


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दिन ‘सहÛद्वीप उद्यान’ ( ज्ीवनेंदक प्ेसंदक च्ंता) में बिताए। वह सेन्ट लोरेन्स नदी के बीच उनकी एक शिष्या की सुन्दर कुटिया थी। वहां स्वामी जी अपने शिष्य-शिष्यायों के लिए अपने हाथ से भारतीय खाने तैयार करते और शाम को भोजन के बाद दो-ढाई घंटे उनकी क्लास लेते थे। इस संबंध में कुमारी एस. ई. ओल्डेन ने लिखा है:

‘‘इस गंधर्व राज्य में हमने आचार्यदेव के साथ सात सप्ताह दिव्य आनन्द से उनके अतींद्रिय राज्य के संदेशों-युक्त अपूर्व वचन


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