या उदाहरण देने का विषय पा लेते थे और एक क्षण ही में वे हमें आकर्षक हिन्दू पौराणिक कथाओं से एकदम गम्भीर दर्शन के बीच ले जाते थे। स्वामी जी
108 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पौराणिक कथाओं का अशेष भंडार थे और वास्तव में प्राचीन आर्यों से बढ़कर अन्य किसी भी जाति मंे इतनी अधिक पौराणिक कथाएं भी नहीं हैं। वह हमें उन कहानियों को सुनाकर प्रसन्न होते थे और हम भी सुनना चाहते थे, क्योंकि वे कभी उन कहानियों की आड़ में जो सत्य निहित है,
या उदाहरण देने का विषय पा लेते थे और एक क्षण ही में वे हमें आकर्षक हिन्दू पौराणिक कथाओं से एकदम गम्भीर दर्शन के बीच ले जाते थे। स्वामी जी
108 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
पौराणिक कथाओं का अशेष भंडार थे और वास्तव में प्राचीन आर्यों से बढ़कर अन्य किसी भी जाति मंे इतनी अधिक पौराणिक कथाएं भी नहीं हैं। वह हमें उन कहानियों को सुनाकर प्रसन्न होते थे और हम भी सुनना चाहते थे, क्योंकि वे कभी उन कहानियों की आड़ में जो सत्य निहित है,