उपनिषदों और पुराणों की कहानियां और वह भी विवेकानन्द की काव्यमय शैली में इन शिष्यगणों के लिए कितनी मनोरंजक होंगी और भौतिक सुख-साधनों से उकताए उनके मन के लिए जगत् को कुछ क्षण के लिए ही भुला देने मंे कितनी राहत देती होंगी, इसका अनुमान लगाना कठिन नहीं है। विवेकानन्द ने एक बार अपने इन शिष्यों से कहा:
‘‘यह एक महान देश है, लेकिन मैं यहां रहना नहीं चाहूंगा। अमेरिकन लोग पैसे को बहुत महत्व देते हैं। वे सब चीज़ों से बढ़कर पैसे को मानते हैं,
उपनिषदों और पुराणों की कहानियां और वह भी विवेकानन्द की काव्यमय शैली में इन शिष्यगणों के लिए कितनी मनोरंजक होंगी और भौतिक सुख-साधनों से उकताए उनके मन के लिए जगत् को कुछ क्षण के लिए ही भुला देने मंे कितनी राहत देती होंगी, इसका अनुमान लगाना कठिन नहीं है। विवेकानन्द ने एक बार अपने इन शिष्यों से कहा:
‘‘यह एक महान देश है, लेकिन मैं यहां रहना नहीं चाहूंगा। अमेरिकन लोग पैसे को बहुत महत्व देते हैं। वे सब चीज़ों से बढ़कर पैसे को मानते हैं,