तुम लोगों को बहुत कुछ सिखाना है। जब तुम्हारा देश भी हमारे भारत की तरह प्राचीन देश बनेगा, तब तुम अधिक समझदार होंगे।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 297)
इस संबंध में एक और घटना का उल्लेख भी आवश्यक है। जब ‘राजयोग’ पुस्तक छपी तो उस समय का प्रसिद्व दार्शनिक विलियम जेम्स उससे इतना प्रभावित हुआ कि वह विवेकानन्द से मिलने आया। विलियम जेम्स को व्यवहारवाद (च्तंहउंजपेउ) का सिद्वान्त प्रतिपादित करने का श्रेय प्राप्त है। इस सिद्वान्त के अनुसार
तुम लोगों को बहुत कुछ सिखाना है। जब तुम्हारा देश भी हमारे भारत की तरह प्राचीन देश बनेगा, तब तुम अधिक समझदार होंगे।’’ (दशम खंड, पृष्ठ 297)
इस संबंध में एक और घटना का उल्लेख भी आवश्यक है। जब ‘राजयोग’ पुस्तक छपी तो उस समय का प्रसिद्व दार्शनिक विलियम जेम्स उससे इतना प्रभावित हुआ कि वह विवेकानन्द से मिलने आया। विलियम जेम्स को व्यवहारवाद (च्तंहउंजपेउ) का सिद्वान्त प्रतिपादित करने का श्रेय प्राप्त है। इस सिद्वान्त के अनुसार